यूपी-पंजाब में काम आई प्रदेश के नेताओं की रणनीति, यूपी में ओमप्रकाश माथुर व सुनील बंसल की भूमिका चर्चा में

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यूपी-पंजाब में काम आई प्रदेश के नेताओं की रणनीति, यूपी में ओमप्रकाश माथुर व सुनील बंसल की भूमिका चर्चा में

  Wed Mar 15, 2017 15:34        Rajasthani

उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के चुनाव प्रबंधन की जमकर तारीफ हो रही है, लेकिन इस प्रबंधन की रणनीति तैयार करने में राजस्थान के दो नेताओं की भी बड़ी भूमिका रही है। इसमें ओमप्रकाश माथुर व सुनील बंसल शामिल हैं। वहीं, दूसरी तरफ पंजाब में जीत से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का भी कद बढ़ा है।

ओम प्रकाश माथुर
पीएम नरेन्द्र मोदी के नजदीकी माने जाने वाले ओम प्रकाश माथुर मारवाड़ से आते हैं। लम्बे राजनीतिक अनुभव का असर हैै कि माथुर को जिस भी राज्य का प्रभारी बनाया जाता है, वहीं भाजपा जीत दर्ज करती है। 

मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र में भाजपा को जिताने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाया गया था। उनके पास बड़े नेताओं के बीच का असंतोष दूर करने का मुख्य काम था। वे लगातार पीएम और राष्ट्रीय अध्यक्ष के सम्पर्क में रहते थे।

एक-एक पल का घटनाक्रम प्रतिदिन दोनो ही नेताओं से साझा किया जाता था। वे समीकरणों को भाजपा के पक्ष में करने में जुटे रहे। पीएम मोदी की रैलियां हो या फिर बड़े नेताओं के बीच समन्वय का काम।

अशोक गहलोत
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पंजाब कांग्रेस में टिकट तय करने के लिए बनाई गई स्क्रीनिंग कमेटी का प्रमुख बनाया गया था। गहलोत की खासियत यह रही कि उन्होंने पार्टी आलाकमान और पंजाब कांग्रेस के नेता केप्टन अमरिन्दर सिंह के बीच समन्वय का काम बेहतरी से किया। 

साथ ही टिकटों को अंतिम रूप देने की भूमिका निभाई। उनकी कोशिश यही रही कि टिकट पंजाब में ही फाइनल हों और उसी को टिकट मिले, जो जीतने की क्षमता रखता हो। उन्होंने पार्टी आलाकमान को भी पूरा विश्वास में रखा। गहलोत ने विपरीत हालात में भी ऐसा समन्वय बैठाया कि टिकटों को लेकर पार्टी के अन्दर बड़े विवाद सामने ही नहीं आए।
सुनील बंसल
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ता के रूप में राजनीति में आने वाले सुनील बंसल को अमित शाह ने 2014 में ही उत्तर प्रदेश भेज दिया था। मूलत: जयपुर जिले के रहने वाले बंसल ने लम्बे समय तक एबीवीपी के संगठन मंत्री के रूप में सेवाएं दी। लोकसभा चुनावों से ठीक पहले उन्हें उत्तर प्रदेश भेज दिया गया था और अमित शाह का उन पर इतना विश्वास था कि जिस प्रदेश में तीन संगठन मंत्री हुआ करते थे। 

वहीं, सुनील बंसल के रूप में मात्र एक संगठन मंत्री दिया गया और उनको पूरा उत्तर प्रदेश का काम दिया गया। तीन साल से बंसल एक-एक सीट को लेकर लगातार काम कर रहे थे। शाह की जीतने वाले को ही टिकट देने की रणनीति के निर्देश के तहत बंसल ने काम किया और इस काम के चलते उन्होंने उत्तर प्रदेश में बूथ स्तर पर भाजपा की टीम बना दी, जो इससे पहले नहीं बन पाई थी। 

बूथ स्तर पर उनका काम इतना मजबूत रहा कि पार्टी के लिए उन्होंने जो निर्णय किया, वह उसी में सफल हुए। उन्होंने जमीनी कार्यकर्ताओं से लगातार सम्पर्क बनाए रखा और उन्हीं से पूरा फीडबैक लिया।

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