इन मंदिरों में पुरुषों का प्रवेश है वर्जित, कहीं कायम है देवी का शाप तो कहीं है ब्रह्मचर्य की शर्त

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इन मंदिरों में पुरुषों का प्रवेश है वर्जित, कहीं कायम है देवी का शाप तो कहीं है ब्रह्मचर्य की शर्त

  Wed Jan 04, 2017 15:33        Devotional, Hindi

आपने ऐसे कई मंदिरों एवं धार्मिक स्थलों के विषय में सुना होगा जहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। इस विषय पर कई संगठनों ने आंदोलन किए परंतु हमारे देश में ऐसे भी कई मंदिर हैं जहां पुरुषों का प्रवेश वर्जित है। ऐसा सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, वहीं वास्तविकता यही है कि आज भी ऐसे कई मंदिर हैं जहां पुरुषों के प्रवेश पर पूर्णत: प्रतिबंध है। 

देवी पार्वती मंदिर, तिरुवनंतपुरम

यह एक प्राचीन मंदिर है जो मां पार्वती को समर्पित है। केरल में स्थित यह मंदिर अत्यंत चमत्कारी माना जाता है। यहां पुरुषों का प्रवेश वर्जित है। इस मंदिर को नारी सबरीमाला के नाम से भी जाना जाता है। यहां दर्शन-पूजन आदि के लिए महिलाओं को ही अनुमति है। एक अनुमान के अनुसार यहां हर साल लाखों महिलाएं दर्शन के लिए आती हैं। कई बार यह आंकड़ा 30 लाख तक पहुंच जाता है। 

श्री भगवती मंदिर, तिरुवल्ला

मां भगवती को समर्पित इस मंदिर में भी पुरुषों के प्रवेश पर पाबंदी है। यहां शक्ति की पूजा होती है जिसमें सिर्फ महिलाएं ही भाग ले सकती हैं। अलप्पुजा जिले में स्थित यह मंदिर पोंगल त्योहार के लिए प्रसिद्ध है। इसमें हजारों महिला श्रद्धालु हिस्सा लेती हैं। इस दौरान होने वाले पूजन-अनुष्ठान आदि करीब एक हफ्ते तक चलते हैं। इसे नारी पूजा के नाम से जाना जाता है जिसमें पुरुषों का प्रवेश वर्जित है।

कन्याकुमारी मंदिर, तमिलनाडु

कन्याकुमारी मां पार्वती का संन्यास स्वरूप माना जाता है। विभिन्न धार्मिक कथाओं के अनुसार इसी स्वरूप में मां भगवती ने शिवजी को पति रूप में पाने के लिए घोर तप किया था। आज भी मंदिर के गर्भगृह में पुरुषों का प्रवेश वर्जित माना जाता है। कन्याकुमारी संन्यास की देवी हैं। वे ब्रह्मचारिणी हैं, अत: ब्रह्मचारियों को ही उनके समीप आने का अधिकार है। 

ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर

भगवान ब्रह्मा का विश्वप्रसिद्ध मंदिर पुष्कर में है। यहां से कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं। एक कथा के अनुसार यहां आज तक देवी सरस्वती का शाप कायम है जिसके कारण मंदिर के गर्भगृह में विवाहित पुरुषों का जाना मना है। प्राचीन काल की एक अन्य कथा के अनुसार देवी सती के वियोग में भगवान शिव के नेत्रों से दो आंसू गिरे थे। पहले आंसू से कटासराज मंदिर का सरोवर बना जो अब पाकिस्तान में स्थित है। दूसरा आंसू पुष्कर में गिरा था।


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