माता का एक ऐसा मंदिर जहां प्रसाद रूप में मिलते है पत्ते

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माता का एक ऐसा मंदिर जहां प्रसाद रूप में मिलते है पत्ते

  Thu Dec 01, 2016 16:39        Rajasthani, Travel

हर वस्तु में ईश्वर का वास होता है और इसी के चलते भारत का एक मंदिर ऐसा भी है जहां प्रसाद के रूप में भक्तों को पत्ते दिए जाते है। माता का एक ऐसा ही एक शक्तिपीठ है सुरकंडा। सुरकंडा मंदिर देवी के 52 शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर ऋषिकेश से वाया चम्बा करीब 80 किमी का सफर तय करने के बाद कद्दूखाल के नजदीक है। कद्दूखाल से यह मंदिर 2 किमी का पैदल सफर कर मंदिर तक पहुंचा जाता है। 

यह पत्ते यहां मौजूद स्थानीय पेड़ रौंसली के होते हैं इन पत्तों को प्रसाद के रूप में दिया जाता है। रौंसली के पत्तों को भक्तजन अपने घरों में रखते हैं।

यह स्थान समुद्रतल से करीब 3 हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर वर्षभर खुला रहता है। यह एक मात्र शक्तिपीठ है जहां गंगा दशहरा पर मेला लगता है। यहां नवरात्र और गंगा दशहरा में दर्शन करना विशेष माना गया है। 

स्कंद पुराण के अनुसार, 'जब दक्ष प्रजापति के यज्ञ में शिव को नहीं बुलाया गया, तो सती ने नाराज होकर हवन कुंड में स्वयं की आहुति दे दी थी। इसके बाद शिव सती को कंधों पर लेकर घुमाते रहे। इस दौरान जहां-जहां सती का जो अंग गिरा वह स्थान उसी नाम से जाना जाने लगा। 

सुरकंडा में माता सती का सिर गिरा था जिस कारण इसका नाम सुरकंडा पड़ा।


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